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आदरणीय दोस्तों, एक ताज़ा ग़ज़ल आपकी समाअतों की नज़्र कर रहा हूँ, म2122-1212-22/112 जिंदगी तेरी जुस्तजू भी नहीं, कोई उम्मीद तेरी सू भी नहीं//1 मुझसे दिल का अजीब है रिश्ता, हमनवां ...